कांग्रेस की रणनीति : हिन्दू बाँटो और राज करो

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विधानसभा चुनाव 2018

राजस्थान में हाल ही में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए। इस चुनाव में कांग्रेस ने 200 में से 99 सीटों पर कब्जा किया। भाजपा को 71 सीटों से ही संतुष्ट करना पड़ा। कांग्रेस ने बसपा और निर्दलीयों के समर्थन से सरकार बना ली। इस चुनाव की खासियत यह रही कि इस चुनाव में जातिवाद पूरी तरह से हावी रहा। चुनाव की घोषणा के बाद कई नेताओं ने दल बदल किये । परिणाम में साफ तौर पर विकास के बजाय जातिवाद की मोहर लगी। हालांकि, पिछले 5 वर्षों में विकास कार्य पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर बहुत भारी थे। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने जातिवाद की रणनीति से चुनाव जीत लिया। आइये समझते है कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने अपने पक्ष में माहौल बनाया।

राजपूत बनाम जाट

2017 में गैंगस्टर आनन्दपाल सिंह के एनकाउंटर को कांग्रेस पार्टी ने भलीभांति भुनाया। कांग्रेस पार्टी गैंगस्टर आनन्दपाल की फरारी पर सरकार को घेर रही थी । लेकिन जैसे ही आनन्दपाल का एनकाउंटर हुआ, कांग्रेस ने बड़ी चालाकी से अपने राजपूत नेताओ को इसको भुनाने में लगा दिया। इन नेताओं ने एनकाउंटर के बाद राजपूत समाज को भाजपा सरकार के खिलाफ भड़काने का काम किया। वही दूसरी ओर कांग्रेस के ही जाट नेताओं ने एनकाउंटर की घटना के बाद जातिवादी उन्माद फैलाया।
कुछ अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस को समर्थन करने वाले जाट नेताओं ने भी इस पुरे माहौल को जाट बनाम राजपूत बनाया। दोनों ही समाजों को भाजपा के विरोध में खड़ा किया गया।

दलित बनाम हिन्दू

राजस्थान में पहली बार सोशल मीडिया के माध्यम से दलित बनाम हिन्दू का जहर फैलाया गया। वीरों की धरती पर इससे पहले कभी भी दलितों को हिन्दुओ से अलग नही माना गया। लेकिन कुछ विपक्षी नेताओं ने राजस्थान में भी दलित समुदाय को हिन्दू धर्म के खिलाफ भड़काने की कोशिश की। जिस धरा पर बाबा रामदेव के भक्त और पुजारी मेघवाल समाज के लोग है। वहाँ दलित समुदाय के कुछ नेताओं द्वारा हिन्दू देवी देवताओं के खिलाफ अपशब्द काम में लिए गए।
वही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में मंत्री सी पी जोशी ने विवादित बयान देते हुए कहा कि ब्राह्मणों के अलावा किसी जाति का व्यक्ति हिन्दू नही है। 2 अप्रैल 2018 को दलित आंदोलन के नाम पर सोशल मीडिया में विपक्षी पार्टीयो ने इसे दलित बनाम हिन्दू के रूप में प्रचारित किया।

हिन्दू बनाम मुस्लिम

राजस्थान के मुस्लिम बहुल क्षेत्रो में सांप्रदायिक तनाव फ़ैलाया गया। जिससे वहाँ का मुस्लिम वोटबैंक भाजपा के खिलाफ एक जुट हो सके। टोंक और नागौर जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रो में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाये गए, जिसके बाद वहाँ का माहौल गर्माया। इसके अलावा भी जयपुर की रामगंज मंडी, भीलवाड़ा और जोधपुर में भी इस तरह का माहौल बनाया गया। लेकिन जिन क्षेत्रों में मुस्लिम जनसंख्या कम है वहाँ इस तरह की कोई घटना नही घटी। जिससे साफ़ हो जाता है कि यह सिर्फ मुस्लिम वोटबैंक को पक्का करने की साजिशे थी।

हिन्दुओ को बांटना , वोटबैंक को बढ़ाना

दरअसल 2014 के चुनाव के भाजपा को मिलने वाले वोट प्रतिशत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। भाजपा मिलने वाले वोट का 98% हिन्दू समुदाय से था। मात्र 2% वोट अन्य समुदायों से मिला जिसमे सिख, मुस्लिम आदि रहे। कांग्रेस के लिए यही 98% वोट सिरदर्द बना हुआ था। इस हिन्दू वोटबैंक को बिखेरने के लिए जातिवाद को हथियार बनाया गया। विपक्षी पार्टियों ने बीते 5 सालों में जातिवादी घटनाओं को प्रोत्साहन देने का काम किया। इससे राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ नकारात्मक सन्देश गया। कांग्रेस को इसका फायदा मिला और कांग्रेस 21 सीट से सीधे 99 सीट पर पहुंच गयी। भाजपा की सरकार 163 सीट से 71 सीट पर सिमट गयी।

राजस्थान और मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में विपक्षी पार्टीयो को हिन्दू वोटबैंक के बिखरने का फायदा मिला। दोनों ही प्रदेशो में चुनाव से पहले जातिवादी घटनाओ को अंजाम दिया गया। इसके चलते भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाया गया और चुनाव जीत लिए गए।

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